शैक्षणिक भ्रमण
चैतुरगढ़ कोरबा
09-01-2019
मेरा नाम कमल प्रसाद चेलक है,
मै कक्षा 11वीं में पढ़ रहा था। राजनीति विज्ञान का क्लास था kp Sahu Sir पड़ा रहे थे तभी स्कूल की शाला नायक ( तानिया साहू) आयी और बोली शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मटीया शैक्षणिक कार्यक्रम (पिकनिक) जाना है।वो लोग पैसे ले आना पिकनिक फीस ₹400 थी। जिसे मैं सुनकर बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे पिकनिक जाना बहुत पसंद है ।स्कूल के सभी student ka पिकनिक फिश कलेक्ट हो गया स्कूल की तरफ से पिकनिक वाला कार्य पूरा हो गया।जैसे ही अगले दिन आया वैसे ही सभी लोग पिकनिक जाने के लिए तैयार हो गए थे । पिकनिक स्थल था चैतुरगढ़ कोरबा 09-01-2019 को सुबह 6.30 बजे school ke ग्राउंड में पहुंच गए दो बस और एक कार थी जिसमें लगभग 150 विद्यार्थी और कुछ टीचर गड़ को बैठ कर जाना था। एक बस में लड़के थे ,
एक बस में लड़की थी ।
लगभग सुबह 7:00 बजे से दोनों बस रवाना हुई चैतुरगढ़ के लिए बुधवार का दिन था ।मैं और मेरे दोस्त सोहन बस के सामने वाले सीट पर बैठे थे औ।रस्ता देखते देखते जा रहे थे लगभग 5 घंटे तक बस चलती रही लगभग 1:00 बजे चैतुरगढ़ पहुंचे । सभी लोग वहां पहुंचने के बाद एक जगह इकट्ठा हुए सभी लोगों को नाश्ता दिया गया और आनंद उठाते सभी लोगो ने नाश्ता किया । उसके बाद सभी लोग चैतुरगढ़ घूमने के लिए ऊपर पहाड़ पर चढ़ने लगे सभी लोगों ने वहां ऊपर जाकर वहां की पुरातात्विक ऐतिहासिक जगहें देखी जो देखने में बेहद आकर्षित थी । मुझे तो वहां का तलाब जो की 3060 फीट ऊंचा था।
और रोचक हजारों फीट ऊपर तालाब बना हुआ था, जो राजा महाराजा के जमाने का था। जो देखने में बेहद आकर्षक था। समय को ध्यान में रखते हुए हम लोग वहां से जल्दी ही घर के लिए निकल गए । रात ना हो जाए इसलिए चैतुर गढ़ से 4.30 बजे वापस घर के लिए रवाना हुआ वही बस रास्ते में लगभग 6:00 बजे खराब हो गई ।और सभी लोगों को इतनी जोर की भूख लग रही लेकिन कोई कर भी क्या सकता था । क्योंकी किसी के पास कुछ खाने के लिए है कुछ है ही नही था।दूसरे बस के इंतजार में देखते-देखते बहुत रात हो गई लेकिन 3 घंटे बाद बस का इंतजार कर रहे थे। 9:00 बजे बस आखिरकार आ ही गई । हम लोगों की बस खराब हो गई थी। जिस बस में लड़कियां बैठी थी उस बस में बैठकर हम लोग रतनपुर आ पहुंचे ।और रात को 12:00 बजे हम लोग खाना खाए बस तो हम लोगों की खराब हो गई थी हम लोग जिस बस में बैठे थे उस बस में लड़कियों को बैठा कर घर भेजा गया और कुछ लड़के लोग भी थे जो रात को घर चले गए ।लेकिन हम लोग वहां रात को रतनपुर में रुके थे । रतनपुर में एक मंदिर के पास धर्मशाला था , हम लोग वहां रात को रुके हुए थे रात को बहुत ठंड लग रही थी । ठंड से हाल बेहाल हो रहा था ।सबह नींद खुली तो बिलासपुर से घर की तरफ आने के लिए बस पकड़ी बस लगभग चलती। रही और हम लोग सुबह 9:00 बजे घर पहुंचे इस तरह पिकनिक की कहानियां खत्म होती है l
Writer
Kamal chalak
Contact 8120741757
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